भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और ब्रिटिश सरकार के बीच कई बार वार्ताएँ और समझौते हुए, जो भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति की दिशा में अहम कदम साबित हुए। इन समझौतों ने भारतीयों के संघर्ष और ब्रिटिश साम्राज्य के अंत को निकट लाया। इस लेख में हम कुछ प्रमुख समझौतों और उनके महत्व पर चर्चा करेंगे, जो कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच हुए थे।
1. चौरी चौरा और असहमति के बाद का समझौता (1922)
चौरी चौरा की घटना (1922) के बाद, महात्मा गांधी ने असहमति जताते हुए असहमति नीति को वापस लिया और असहमति आंदोलन को स्थगित कर दिया। कांग्रेस के भीतर इस निर्णय के खिलाफ कुछ विरोध भी हुआ, लेकिन गांधी जी का यह निर्णय ब्रिटिश सरकार के साथ बातचीत के लिए एक नए रास्ते का उद्घाटन था। हालांकि यह एक असहमति के बाद हुआ समझौता था, फिर भी इसने ब्रिटिश सरकार से बातचीत की ओर एक संकेत दिया।
2. लॉर्ड विलिंगडन के साथ दिल्ली समझौता (1919)
भारत में पहले विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट (1919) लागू किया, जिससे भारतीयों के खिलाफ अत्यधिक सख्ती बढ़ गई थी। इसके विरोध में गांधी जी ने असहमति आंदोलन शुरू किया। इस दौरान कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार से बातचीत शुरू की और दिल्ली समझौता हुआ। इस समझौते में, कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया था, हालांकि यह समझौता असफल रहा और गांधी जी ने इसे स्थगित कर दिया।
3. कमेटी ऑफ़ नाइन और 1930 का गांधी-इरविन समझौता
गांधी-इरविन समझौता (1931) एक प्रमुख समझौता था, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस समझौते को ब्रिटिश सरकार और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच एक निर्णायक बातचीत के रूप में देखा जाता है। गांधी जी और लॉर्ड इरविन, जो उस समय ब्रिटिश वायसराय थे, ने कई मुद्दों पर चर्चा की और यह समझौता हुआ।
- मुख्य बिंदु:
- गांधी जी ने भारतीयों के खिलाफ जलियांवाला बाग जैसी नीतियों का विरोध किया।
- ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों की अधिक स्वायत्तता को मंजूरी दी, विशेषकर संविधान और दमनकारी क़ानूनों में बदलाव करने की दिशा में।
- गांधी जी ने कांग्रेस को ब्रिटिश क़ानूनों के खिलाफ अहिंसक आंदोलन जारी रखने का अधिकार दिया।
- ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी को जेल से रिहा किया।
यह समझौता कांग्रेस द्वारा एक अहम पहल के रूप में देखा गया, जिससे भारतीयों को स्वराज प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मिला।
4. लक्ष्मी पटेल की शुरुआत और 1942 का 'भारत छोड़ो आंदोलन'
ब्रिटिश सरकार से समझौते की प्रक्रिया के तहत कांग्रेस ने लक्ष्मी पटेल के साथ समझौते की शुरुआत की, जहां उन्होंने ब्रिटिश सरकार से स्वराज की मांग की। हालांकि, यह समझौता असफल रहा और इसके बाद कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष के रूप में सामने आया, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा डाली।
5. 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति का समझौता
ब्रिटिश सरकार और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच भारत विभाजन और स्वतंत्रता प्राप्ति के समझौते की प्रक्रिया ने अंतिम चरण में कदम रखा। लॉर्ड माउंटबेटन, जो उस समय ब्रिटिश वायसराय थे, ने भारत के विभाजन और पाकिस्तान के निर्माण की योजना बनाई।
- मुख्य बिंदु:
- कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच 1947 में पाकिस्तान के निर्माण के लिए समझौता हुआ।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विभाजन स्वीकार किया और पाकिस्तान के निर्माण को मंजूरी दी।
- भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त हुई, लेकिन यह स्वतंत्रता और विभाजन की कीमत के रूप में बड़ी हिंसा और लाखों लोगों की जानें गईं।
निष्कर्ष
कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच कई प्रमुख समझौते भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। इन समझौतों में कभी सहमति और कभी असहमति के परिणाम सामने आए, लेकिन अंततः यह सभी कदम भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुए। गांधी-इरविन समझौता और 1947 का विभाजन जैसे समझौतों ने भारतीय राजनीति और समाज पर गहरा असर डाला और भारत को स्वतंत्रता की ओर अग्रसर किया।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें