बुधवार, 18 दिसंबर 2024

क्यों ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस नेताओं को फांसी की सजा नहीं दी?

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारतीय नेताओं के खिलाफ कठोर दंडात्मक उपाय अपनाए, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, उन्होंने किसी भी प्रमुख कांग्रेस नेता को फांसी की सजा नहीं दी। कई कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार किया गया, उन्हें जेल भेजा गया और अन्य कड़ी सजा दी गई, लेकिन फांसी का दंड कभी नहीं दिया गया। तो सवाल यह उठता है कि क्यों कांग्रेस के नेताओं को फांसी की सजा नहीं दी गई? आइए इस पर विचार करते हैं।

1. कांग्रेस का अहिंसक दृष्टिकोण

ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के नेताओं को फांसी की सजा नहीं दी क्योंकि उनका संघर्ष अहिंसक था। महात्मा गांधी, पं. नेहरू, और सरदार पटेल जैसे नेता अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों पर विश्वास करते थे। इन नेताओं का मानना था कि भारतीय स्वतंत्रता अहिंसा के मार्ग से प्राप्त की जा सकती है। महात्मा गांधी के नेतृत्व में, कांग्रेस ने नमक सत्याग्रह, नमक कानून, और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया, जो पूरी तरह से अहिंसक थे। ब्रिटिश सरकार ने देखा कि ये आंदोलन सीधे तौर पर ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के बजाय उन्हें विरोध में खड़ा करने के लिए थे, और इसलिए उन्होंने इन्हें फांसी देने का खतरा नहीं मोल लिया।

2. कांग्रेस नेताओं की लोकप्रियता

कांग्रेस नेताओं, खासकर महात्मा गांधी, पं. नेहरू, और सरदार पटेल की भारतीय जनता में गहरी और व्यापक लोकप्रियता थी। यदि ब्रिटिश सरकार ने इन नेताओं को फांसी दी होती, तो इससे भारत में एक और बड़ा विद्रोह पैदा हो सकता था और ब्रिटिश सरकार की स्थिति और कमजोर हो जाती। फांसी देने के बजाय, ब्रिटिश सरकार ने उन्हें लंबी जेल की सजा दी या उन्हें नजरबंद रखा, ताकि इनकी लोकप्रियता को दबाया जा सके। फांसी देने से यह नेताओं को शहीद का दर्जा मिलता और जनता का आक्रोश और भी बढ़ सकता था।

3. कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति

कांग्रेस का रुख हमेशा से ब्रिटिश शासन के खिलाफ था, लेकिन उसका उद्देश्य अहिंसक तरीके से सत्ता में सुधार लाना था। कांग्रेस के नेता संविधानिक उपायों से ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दे रहे थे और स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहे थे। गांधी जी का मानना था कि भारत को स्वतंत्रता अहिंसा, शांतिपूर्ण विरोध और संवाद के माध्यम से मिल सकती है। उनका आंदोलन हिंसा से दूर था, और इसके तहत ब्रिटिश सरकार के खिलाफ किसी तरह की सैन्य चुनौती का सामना नहीं था।

ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को एक राजनीतिक संगठन माना जो लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से स्वतंत्रता की ओर अग्रसर था, जबकि क्रांतिकारी आंदोलन एक सशस्त्र संघर्ष था। यही कारण था कि क्रांतिकारी नेताओं, जैसे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई, क्योंकि वे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में शामिल थे।

4. क्रांतिकारी नेताओं से अंतर

कांग्रेस के नेताओं की तुलना में क्रांतिकारी नेता ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सीधे तौर पर हिंसक कार्रवाइयों में शामिल थे। जैसे भगत सिंह, राजगुरु, और सुखदेव ने ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या और अन्य उग्र कार्रवाइयों को अंजाम दिया था, जिससे ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सख्त सजा दी। इन क्रांतिकारी नेताओं का संघर्ष सीधे ब्रिटिश शासन के खिलाफ था और उनका उद्देश्य हिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना था। इसके विपरीत, कांग्रेस नेताओं का आंदोलन अहिंसा और शांतिपूर्ण तरीके से ब्रिटिश शासन को चुनौती देने पर केंद्रित था।

5. ब्रिटिश सरकार की रणनीति और कूटनीति

ब्रिटिश साम्राज्य अपनी राजनीतिक रणनीति में कांग्रस को जेल में डालकर निष्क्रिय करना चाहता था, बजाय इसके कि उन्हें फांसी दी जाए। ब्रिटिश सरकार को यह डर था कि अगर उन्होंने कांग्रेस नेताओं को फांसी दी, तो यह भारत में और अधिक असंतोष और विद्रोह को जन्म देगा। इसके बजाय, वे कांग्रेस नेताओं को जेल में रखने या उन्हें नजरबंद करने में विश्वास करते थे, ताकि उनके प्रभाव को दबाया जा सके।

इसके अलावा, ब्रिटिश सरकार ने समय-समय पर कांग्रेस से बातचीत की और समझौते किए, जैसे गांधी-इर्विन समझौता और राउंड टेबल सम्मेलन। वे कांग्रेस के नेताओं को जेल भेजकर भी राजनीतिक बातचीत के दरवाजे खुले रखना चाहते थे।

निष्कर्ष

ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस नेताओं को फांसी की सजा नहीं दी, क्योंकि उनका आंदोलन अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित था और उनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने की बजाय सुधार लाना था। इन नेताओं की लोकप्रियता और अहिंसक विरोध ने ब्रिटिश सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि इनको फांसी देने से भारत में और ज्यादा उबाल आ सकता है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती थी। इसके बजाय, कांग्रेस के नेताओं को जेल भेजने और अन्य कड़ी सजा देने से उनका प्रभाव तो सीमित किया जा सकता था, लेकिन उन्हें शहीद बनाने से बचा जा सकता था।

इसका विपरीत, जो क्रांतिकारी नेता सशस्त्र संघर्ष में शामिल थे, उन्हें ब्रिटिश शासन ने फांसी दी, क्योंकि उनका विरोध सीधे ब्रिटिश साम्राज्य के अस्तित्व के लिए खतरा था। इस प्रकार, कांग्रेस के नेताओं को फांसी की सजा नहीं दी गई, लेकिन उनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण था और उन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें